Saturday, 14 November 2015

सीख

कभी कभी वो परमेश्वर भी अपने होने का एहसास दिलाता है और बतलाता है कि वो हमसे कितना प्यार करता है,कितनी फ़िक्र करता है हमारी
इसी बात पे वसीम बरेलवी साहब का शेर याद आता है....
खुली छतों के दीये कब के बुझ गए होते
पर कोई तो है जो आँधियों के पर कतरता हैं
-वसीम बरेलवी

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